लगभग साढ़े 13,000 अस्थायी उपनल कर्मियों को अब पक्के कर्मचारियों के समान कार्य के लिए समान वेतन देने का रास्ता साफ हो चुका है। इसके लिए सैनिक कल्याण सचिव द्वारा विधिवत आदेश भी जारी कर दिया गया है। पिछली कैबिनेट बैठक में सरकार ने कट-ऑफ संशोधन को लेकर मंजूरी दी थी। पहले 10 साल की सेवा की कट-ऑफ 25 अप्रैल 2015 तक निर्धारित की गई थी।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य के अस्थायी उपनल कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने का आदेश सरकार को दिया था। इस आदेश के बाद लगभग साढ़े 13,000 उपनल कर्मचारियों के वेतन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। समान कार्य समान वेतन की मांग पर विभिन्न विभागों के उपनल कर्मचारियों को करीब 10 साल बाद यह राहत मिली है। बता दें, हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसमें हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा गया था। उसके बाद सरकार ने कैबिनेट द्वारा उपनल कर्मचारियों को समान कार्य समान वेतन देने का प्रस्ताव पास किया था।
अब विभागों के अधीन आ जाएंगे अस्थायी कर्मचारी
बता दें, यह प्रक्रिया अब चरणबद्ध तरीके से चलेगी। तय की गई कट-ऑफ के अनुसार 12 नवंबर 2018 तक नियुक्त किए गए उपनल कर्मचारियों को समान कार्य समान वेतन का लाभ दिया जाएगा। सैनिक कल्याण विभाग में वित्त विभाग की सहमति के बाद संशोधित आदेश जारी किया गया है। कर्मचारियों को समान वेतन के लिए अब संबंधित विभाग से कॉन्ट्रैक्ट करना होगा। इसके लिए सरकार की ओर से सभी विभागों के लिए नई गाइडलाइन जारी की जाएगी। इससे समान वेतन के लिए यह सभी कर्मचारी उपनल से हटकर सीधे अपने विभाग के अधीन माने जाएंगे। अभी तक इन कर्मचारियों से आउटसोर्स कर्मचारी की तरह काम लिया जा रहा है और इन्हें आउटसोर्स की तरह ही नियुक्त किया गया था। अभी वर्तमान में इन्हें ₹19,000 से लेकर ₹20,000 तक वेतन दिया जा रहा था। अब समान कार्य समान वेतन के बाद इनका वेतन लगभग ₹41,000 तक हो जाएगा और भविष्य में इन्हें समान कार्य समान वेतन के अलावा पर्मानेंट कर्मचारियों की तरह अन्य सुविधाएं भी मिल सकती हैं।
न्यायालय ने नियमितीकरण के भी निर्देश दिए थे
बता दें, यह एक ऐसा मामला है जो ऐतिहासिक निर्णय से जुड़ा हुआ है। 2018 में उत्तराखंड के उच्च न्यायालय द्वारा एक आदेश दिया गया था, जिसमें समान काम करने वाले उपनल कर्मचारियों को समान वेतन देने के साथ-साथ नियमितीकरण करने के लिए भी सरकार से विचार करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा था और काफी समय बाद इसका अंतिम निर्णय आया। इसके बाद 3 फरवरी 2026 को शासन ने समान काम के बदले समान वेतन देने का बड़ा आदेश जारी किया था। 10 साल की सेवा पूरी करने वाले उपनल कर्मचारियों को पहले चरण में समान कार्य समान वेतन देने की बात कही गई थी। अब कट-ऑफ डेट में संशोधन करने के लिए एक नया आदेश जारी किया गया है, जिसमें हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप 12 नवंबर 2018 को ही अंतिम कट-ऑफ डेट मानी गई है। पहले चरण में 1 जनवरी 2016 से पहले नियुक्त उपनल कर्मचारियों को लाभ दिया जाएगा और दूसरे चरण में 1 जनवरी 2016 से लेकर 12 नवंबर 2018 तक नियुक्त किए गए आउटसोर्स उपनल कर्मचारियों को समान कार्य समान वेतन की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। हालांकि, सरकार द्वारा 2018 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। संविदा कर्मचारी लगातार 2018 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए नीति बनाने की मांग कर रहे हैं, जिससे उन्हें भी समान कार्य समान वेतन का लाभ मिल सके।
