MP Teacher TET News: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे कई शिक्षकों के मन में इन दिनों एक सवाल घूम रहा है, अगर किसी शिक्षक ने अभी तक TET पास नहीं किया है तो क्या उसकी नौकरी पर असर पड़ेगा? वजह यह है कि लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल की तरफ से एक नया नोटिस जारी किया गया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया गया है। इस नोटिस में साफ कहा गया है कि प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET पास करना जरूरी होगा। यही कारण है कि अब शिक्षा विभाग जिलों में ऐसे शिक्षकों की जानकारी भी जुटा रहा है जिन्होंने अभी तक यह परीक्षा पास नहीं की है। आईए जानते हैं सरकार द्वारा नॉन TET शिक्षकों के लिए क्या दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य में भेजा गया नोटिस
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का जिक्र किया गया है। दरअसल यह मामला शिक्षा का अधिकार कानून 2009 से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने सिविल अपील नंबर 1385/2025 और 1386/2025 समेत कुछ अन्य मामलों की सुनवाई के दौरान साफ कहा कि स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करना जरूरी है। इसी आदेश के आधार पर मध्य प्रदेश में भी अब जिलों और संभागों के अधिकारियों को निर्देश भेजे गए हैं। यहां समझने वाली बात यह है कि यह फैसला अचानक नहीं आया बल्कि कई साल से चल रहे मामलों के बाद यह स्थिति बनी है।
किन शिक्षकों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है
यहां सबसे अहम सवाल यही है कि यह नियम किन शिक्षकों पर लागू होगा। नोटिस में बताया गया है कि ऐसे शिक्षक जो शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने से पहले स्कूलों में भर्ती हुए थे और जिनकी रिटायरमेंट में अभी पांच साल से ज्यादा समय बचा है, उन्हें सेवा जारी रखने के लिए TET पास करना होगा। कोर्ट ने इसके लिए दो साल का समय देने की बात कही है। मान लीजिए कोई शिक्षक अभी स्कूल में पढ़ा रहा है और उसकी रिटायरमेंट में सात या आठ साल का समय बचा है लेकिन उसने TET पास नहीं किया है, तो ऐसे शिक्षक को दो साल के अंदर यह परीक्षा पास करनी पड़ेगी, नहीं तो उसकी सेवा पर असर पड़ सकता है।
समय पर परीक्षा पास नहीं करने पर क्या हो सकता है
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में यह भी साफ कहा गया है कि अगर कोई शिक्षक तय समय के भीतर TET पास नहीं करता है तो उसे नौकरी छोड़नी पड़ सकती है या फिर उसे अनिवार्य रिटायरमेंट दी जा सकती है। हालांकि एक बात और जोड़ी गई है कि ऐसे शिक्षकों को उनके सेवा नियमों के मुताबिक मिलने वाले टर्मिनल बेनिफिट्स दिए जा सकते हैं। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि उन्होंने सेवा की वह अवधि पूरी की हो जो नियमों में तय है। अगर किसी शिक्षक की सेवा अवधि में कोई कमी निकलती है तो वह सरकार के सामने अपना पक्ष रख सकता है और विभाग उसके मामले पर अलग से विचार कर सकता है।
नए शिक्षकों और प्रमोशन पाने वालों के लिए भी यही नियम
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में एक और बात दोहराई है जो भविष्य की भर्तियों से जुड़ी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि जो भी उम्मीदवार शिक्षक बनने की इच्छा रखते हैं या जो शिक्षक प्रमोशन के जरिए पद पाना चाहते हैं, उनके लिए भी TET पास करना जरूरी होगा। अगर किसी उम्मीदवार ने यह परीक्षा पास नहीं की है तो उसकी उम्मीदवारी पर विचार ही नहीं किया जाएगा। इसी के साथ शिक्षा विभाग ने संकेत दिया है कि राज्य में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा का आयोजन जुलाई या अगस्त 2026 के आसपास कराया जा सकता है, ताकि जिन शिक्षकों ने अभी तक TET पास नहीं किया है उन्हें मौका मिल सके।
